शुभ अवसर यह मनुष तन, मिला भाग से तोहि,फंस कर माया मोह में, टेऊँ तां मत खोय
स्वामी टेऊँराम जी महाराज द्वारा रचित श्री प्रेम प्रकाश ग्रन्थ पृष्ठ क्रमांक 417 पर अंकित दोहावली का दोहा क्रमांक 464
धमतरी _ आइस ऑफ छत्तीसगढ़ टीम _ दुर्लभ मानुष देहि अर्थात् मनुष्य का शरीर प्रभु परमात्मा की अहेतुकी कृपा एवं पुण्योदय से मिला है इसके द्वारा प्रभु परमात्मा ने जीव को एक स्वर्णिम अवसर अर्थात् अनुकूल समय दिया है जिसको वह भजन करने परोपकार करने एवं आत्म ज्ञान अर्जित करने माने आत्म साक्षात्कार करने हेतु पुरुषार्थ कर इसका पूरा पूरा लाभ ले इस शुभ अवसर को माया मोह में फंसकर व्यर्थ मत खोइये जैसे श्री कृष्ण भगवान ने दुर्योधन एवं अर्जुन दोनों को यह अवसर दिया कि एक तरफ मेरी नारायणी सेना है और एक तरफ मैं स्वयं नारायण खड़ा रहूंगा अब जो तुम्हें दोनों को मांगना है मांगो अर्जुन ने अवसर का लाभ उठाया और नारायण का चयन किया एवं दुर्योधन ने माया मोह के वाशीभूत हो नारायणी सेना मांग अपना शुभ अवसर खो दिया ऐसा अनुभवी ज्ञान देकर जीव का कल्याण करने वाले आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज के 140 वें जन्मोत्सव के चालीहा पर्व के 10 वें दिन के कार्यक्रम का आयोजन गुरुभक्त प्रहलाद आहूजा नीरज आहूजा के परिवार के द्वारा कराया गया जिसमें सत्संग के दौरान संत जी के द्वारा भजन प्रस्तुत किया गया जो आचार्य प्रवर के द्वारा राग भैरवी में रचित है एवं प्रेम प्रकाश ग्रन्थ साहब के पृष्ठ 98 पर शोभायमान है *यह अवसर नाहिं गंवाओ, तुम राम भजन चित्त लाओ,तरुवर भी अवसर में फूले, अवसर रवि शशि ऊगे। तैसे तुम भी इस अवसर में, गोविन्द के गुन गाओ,और पदार्थ फिर फिर मिलता, मिले न फिर यह चोला। तांते तुम मानुष चोले में, हरि का नाम ध्याओ,भूत काल का सोच न कीजे, भविष्यत् को भी छोड़ो। वर्तमान में राग द्वेष बिन, पावन कर्म कमाओ,कहे टेऊँ जे निज हित चाहो, कदर समय का करले। भाग बड़े यह अवसर पाया, तांको सफल बनाओ
इस भजन को मधुर राग के साथ गाकर बताया गया कि आचार्य प्रवर ने इस भजन के माध्यम से हमें समय के महत्व को समझने की शिक्षा देते हुए समझाया है कि मनुष्य जन्म का जो हमें अवसर मिला है उसका लाभ लो इसे तत्काल अर्थात अभी से राम भजन में लगाए अगर अभी यौवन अवस्था में भजन नहीं करोगे तो वृद्धा अवस्था में भजन करना बड़ा ही कठिन एवं दूभर हो जायेगा क्योंकि वृद्धावस्था में आपके सभी अंग कमजोर हो जायेंगे कान सत्संग सुन नहीं सकेंगे आँखे दृष्टि कमजोर होने के कारण मंदिर में विराजमान प्रभु का सद्गुरु महाराज के विग्रहों के दर्शन नहीं कर पायेंगे पैर भी कमजोर हो जायेंगे जिससे तीर्थ करना तो दूर मंदिर तक भी जा नहीं पाओगे शरीर कमजोर हो जायेगा जिसके कारण पदमासन में बैठ नाम सिमरन नहीं कर पाओगे मुख से प्रभु के गुणवाद नहीं कर पाओगे स्मरण शक्ति भी क्षीण हो जाएगी भगवान का नाम कहाँ याद आएगा इसलिए अभी इसी समय इसी पल से अपने चित को राम भजन में लगा लो गुरु महाराज जी ने आगे लिखा है कि प्रभु की बनाई इस सृष्टि में सभी कार्य अवसर पर ही होते हैं वृक्ष भी समय पर फल देते हैं सूर्य चाँद भी समय पर उदय होते हैं समय पर अस्त होते हैं इसी प्रकार आप भी इस शुभ अवसर मनुष्य तन में वह भी अभी युवावस्था में ही गोविन्द के गुण गाओ भूत एवं भविष्य की व्यर्थ की बातों की चिंता को छोड़ वर्तमान में अभी से ही राग द्वेष रहित पावन कर्म करने में लग जाओ अंतिम पंक्ति में गुरु महाराज जी आगाह करते हुए कह रहे हैं कि आप यदि अपना हित चाहते हो तो समय का कदर करो बड़े ही भाग्य से ये अवसर मिला है फिर मिले न मिले इसे भजन कर सफल कर ले यही बात आचार्य प्रवर ने सोलह शिक्षाओं में से एक शिक्षा में बताया है कि *समय का अति कदर करना खोइये न कुसंग में जो बचे व्यवहार से सो सफल कर सत्संग में*


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