सीएम हेल्पलाइन को भी ठेंगा? धमतरी जिले के बगरूमनाला में अवैध रेत खनन पर खनिज विभाग के दावों की खुलती पोल

 सीएम हेल्पलाइन को भी ठेंगा? धमतरी जिले के बगरूमनाला में अवैध रेत खनन पर खनिज विभाग के दावों की खुलती पोल




राजेश चावला 

आइस ऑफ छत्तीसगढ़ _धमतरी जिले में अवैध रेत खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बगरूमनाला पंचायत क्षेत्र की दो रेत खदानों में प्रशासनिक कार्रवाई के दावों के बावजूद दिन-रात अवैध उत्खनन और परिवहन का खेल जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रदेश सरकार ने 15 जून से रेत घाटों में उत्खनन और परिवहन पर रोक लगा रखी है, तब आखिर किसके संरक्षण में यह कारोबार संचालित हो रहा है? 

बताया जा रहा है कि 13 जून को सीएम हेल्पलाइन में इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि मौके पर वास्तविक स्थिति की जांच किए बिना विभाग ने कागजी कार्रवाई कर मामले के निराकरण का दावा कर दिया। जबकि क्षेत्र के लोगों का कहना है कि हितली घाट में सलारिया और आमापारा क्षेत्र में सेन्दूर नदी से रोजाना दर्जनों हाईवा वाहनों के माध्यम से रेत का परिवहन जारी है

स्थानीय सूत्रों के अनुसार दोनों घाटों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में रेत निकाली जा रही है। ग्रामीण बताते  है कि अवैध परिवहन से जुड़े शैलेन , निखिल और चौहान द्वारा प्रति वाहन तय 4 हजार रकम वसूली जा रही है। जिससे  रोजाना  लाखों की अवैध कमाई की जा रही जिससे अवैध खनन का मामला नहीं बल्कि शासन-प्रशासन के आदेशों की खुली अवहेलना भी है।

गौरतलब है कि कोरिया जिले में सामने आए रेत खनन विवाद के बाद प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री द्वारा जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सीएम हेल्पलाइन को भी प्रभावी शिकायत निवारण का माध्यम बनाया गया है। इसके बावजूद यदि शिकायतों का निराकरण केवल कागजों में हो रहा है और जमीनी स्तर पर गतिविधियां जारी हैं, तो यह सीधे-सीधे शासन को गलत जानकारी देने का मामला माना जा सकता है।

अब सबसे बड़ा सवाल खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर है। यदि कार्रवाई हुई थी तो अवैध परिवहन कैसे जारी है? यदि मशीनें सील की गई थीं तो रेत घाटों से रोजाना वाहनों की आवाजाही किसकी निगरानी में हो रही है? और यदि शिकायत झूठी थी तो क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे वीडियो और स्थानीय शिकायतों का जवाब कौन देगा?

मामले की निष्पक्ष जांच और सीएम हेल्पलाइन में दिए गए निराकरण की समीक्षा आवश्यक है। साथ ही शिकायतों के विपरीत तथ्य पाए जाने पर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। जिले के लोगों की नजर अब प्रशासन और कलेक्टर की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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