किसमें है दम जो करे हमे बंद, हम है किंग, करेंगे टिंग टिंग

किसमें है दम जो करे हमे बंद, हम है किंग, करेंगे टिंग टिंग 

धमतरी _आइस ऑफ छत्तीसगढ़ _धमतरी शहर के भीतर अवैध सट्टा कारोबार अब सिर्फ पर्दे के पीछे नहीं, बल्कि खुलेआम चुनौती बन चुका है। “किसके में है दम जो छेड़े हमें… हमने तो खुद पांच धुरंधरों को पटखनी दी है”—इस तरह की भाषा बोलने वाले दो तथाकथित “टिंगू मास्टर” आज सिस्टम को सीधी चुनौती देते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि आखिर इन्हें यह हिम्मत मिल कहाँ से रही है? सूत्रों के मुताबिक, ये दोनों छोटे कद के सटोरिये पिछले दो वर्षों से शहर और आसपास के इलाकों में मटका सट्टा और क्रिकेट सट्टा का बड़ा नेटवर्क चला रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि इनका कारोबार अब सिर्फ सट्टे तक सीमित नहीं रहा—बल्कि कथित तौर पर करोड़ों की संपत्ति खड़ी करने तक पहुंच गया है। पॉश इलाके में 3200 स्क्वेयर फीट जमीन खरीदने से लेकर ढाबे में लाखों के चारपहिया वाहन, हाईवा और 60 लाख से ज्यादा कीमत की मशीनरी तक—सब कुछ खुलेआम चर्चा में है। इतना ही नहीं, ये खुद दावा कर रहे हैं कि खनिज कार्य से जुड़े लोगों को मशीनें किराए पर देते हैं। यानी अवैध कमाई को वैध धंधों में खपाने का खेल भी जोरों पर है।सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिन पर इन गतिविधियों पर लगाम लगाने की जिम्मेदारी है, उन्हीं पर सवाल खड़े हो रहे हैं। “पांच प्रमुख विकेट गिरवा चुके हैं”—इस दावे के मायने क्या हैं? क्या यह सिस्टम में सेंध का संकेत है या फिर जिम्मेदारों की चुप्पी की मजबूरी?

शहर में चर्चा है कि खुद  कहते फिरते है की “बोटी” हर जगह पहुंच रही है। यही वजह है कि  एजेंसियां भी इन पर नकेल कसने में अब तक नाकाम दिख रही हैं। दो साल से खुलेआम चल रहे इस अवैध कारोबार पर कार्रवाई का अभाव कई सवाल खड़े करता है ........क्या यह लापरवाही है, मिलीभगत है या फिर डर?

अब देखना यह है कि जिम्मेदार जागते हैं या “टिंगू मास्टर” का यह खुला खेल यूं ही चलता रहेगा।

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