धमतरी जिले में पुलिस व्यवस्था पर सवाल,मीडिया में सुर्खियां आने के बाद ही कार्रवाई
धमतरी _ जिले में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली इन दिनों संदेह के घेरे में है। जिले के कई थानों के प्रभारी अपने थाना क्षेत्र में चल रही अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण करने में लापरवाह नजर आ रहे हैं। इसके कई मायने हो सकते हैं, लेकिन जिस तरह से बीते कुछ दिनों से मीडिया लगातार विभिन्न थाना क्षेत्रों और विशेष गठित टीमों की कार्यशैली पर सवाल उठा रही है, वह स्थिति की गंभीरता को उजागर करता है। चौंकाने वाली बात यह है के जिन अवैध गतिविधियों की जानकारी मीडिया में प्रमुखता से सामने आती है, उन्हीं मामलों में एक-दो दिन बाद संबंधित थाना प्रभारी सक्रिय होते दिखाई देते हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि या तो थानेदार और प्रभारी कप्तान के निर्देशों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे, या फिर वे जानबूझकर अपने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति से कप्तान को अवगत नहीं करा रहे हैं।
यह मानना मुश्किल है कि जिन अवैध गतिविधियों की पूरी जानकारी मीडिया तक पहुंच रही है, उनसे पुलिस अनजान हो। इसके बावजूद जब तक खबर सुर्खियों में नहीं आती, तब तक कार्रवाई नहीं होती। इससे यह सवाल उठता है कि जिले के कुछ थानों और विशेष शाखाओं में सब कुछ सही तरीके से नहीं चल रहा है। .............ताजा उदाहरण कुरूद विधानसभा क्षेत्र के भखारा इलाके का है, जहां मीडिया में मामला सामने आने के बाद लगातार दो दिनों में जुआरियों को ताश-पत्ती और हजारों रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया गया। इसी तरह प्रदेश में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे का गढ़ बन चुके धमतरी में भी मीडिया में सुर्खियां आने के बाद ही कार्रवाई हो पाई और एक युवक करीब 17 लाख रुपये की संपत्ति के साथ पुलिस के हत्थे चढ़ा। गंगरेल जैसे बड़े पर्यटन स्थल का मामला भी कम गंभीर नहीं है। जहां जिला प्रशासन पर्यटन विकास के लिए प्रयास कर रहा है, वहीं वहां महुआ शराब बनाने का अवैध कारोबार चल रहा था। इस पर भी मीडिया के उजागर करने के बाद ही कार्रवाई हुई और शराब निर्माण में प्रयुक्त सामग्री को नष्ट किया गया।
ये उदाहरण यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि जिले के कई थाना क्षेत्रों में हालात संतोषजनक नहीं हैं। या तो थानेदार और प्रभारी कप्तान को गुमराह कर रहे हैं, या फिर उनके आदेशों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। यह एक गंभीर विषय है। अब देखने वाली बात यह होगी कि धमतरी के तेजतर्रार कप्तान इस स्थिति को कितनी गंभीरता से लेते हैं और इस पर क्या ठोस कदम उठाते हैं।




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