धमतरी : नगर पंचायत में ‘पार्षद राज’! सीएमओ से ऊपर चलता है युवा पार्षद का आदेश
धमतरी _ टीम आइस ऑफ छत्तीसगढ़ _छत्तीसगढ़ प्रदेश की एक नगर पंचायत इन दिनों सुशासन नहीं, बल्कि “पार्षद राज” को लेकर सुर्खियों में है। हालात ऐसे हैं कि एक नव निर्वाचित युवा पार्षद खुद को मानो नगर पंचायत का सीएमओ समझ बैठा है। विभाग में बैठकर वह न केवल कार्यों का संचालन कर रहा है, बल्कि अधिकारी-कर्मचारी भी उसके हर आदेश का अक्षरशः पालन करते नजर आ रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यह पार्षद नगर पंचायत में जारी निविदा (टेंडर) प्रक्रिया का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में रखे हुए है। किस ठेकेदार को काम मिलेगा, किसे बाहर किया जाएगा, टेंडर की शर्तें क्या होंगी, कौन-सा कार्य किस हिस्से में बंटेगा......इन सभी फैसलों में उसी पार्षद की चलती है।
अधिकारी मौन, आदेशों का हो रहा पालन
विडंबना यह है कि नगर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस पूरे मामले में पूरी तरह मौन हैं। पार्षद जो कह दे, वही अंतिम आदेश माना जा रहा है। चर्चा है कि इस “असाधारण आज्ञाकारिता” के पीछे कोई मोटी सेटिंग काम कर रही है, जिसके चलते अधिकारी पार्षद की हां में हां मिलाने को मजबूर हैं।
टेंडर नहीं खुले, सवालों में प्रक्रिया
सूत्र बताते हैं कि नगर पंचायत में एक दर्जन से अधिक निर्माण कार्यों के लिए टेंडर लगाए गए हैं, जिन्हें निविदा नियमों के अनुसार 4 दिसंबर को खोला जाना था। लेकिन हैरानी की बात यह है कि तय तारीख बीत जाने के बाद भी अब तक टेंडर नहीं खोले गए। कारण साफ बताया जा रहा है.....पार्षद की हामी नहीं मिली। यानी जब तक पार्षद सहमत नहीं होंगे, तब तक टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
ऑनलाइन टेंडर बना परेशानी की जड़?
इस बार राज्य सरकार के निर्देश पर टेंडर फार्म ऑनलाइन भरे गए, जिससे बड़ी संख्या में ठेकेदारों ने भाग लिया। यही बात पार्षद और अधिकारियों की पुरानी सेटिंग पर भारी पड़ गई।बताया जा रहा है कि इसी वजह से टेंडर जानबूझकर नहीं खोले गए और पार्षद खुद ठेकेदारों को फोन कर टेंडर से बाहर होने की धमकी देने लगा।
धमकी भरे ऑडियो वायरल
मामला तब और गंभीर हो गया जब पार्षद का धमकी भरा ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। ऑडियो में पार्षद ठेकेदारों से साफ कहता सुनाई दे रहा है कि यदि उसकी बात नहीं मानी गई तो टेंडर निरस्त कर दिया जाएगा। यहां तक कि टेंडर मिलने के बाद भी उनके क्षेत्र में काम कैसे करोगे, यह कहकर डराने की कोशिश की जा रही है। इतना ही नहीं, पार्षद कथित तौर पर गोपनीय टेंडर दस्तावेजों से जुड़े कागजात कम कराने और ठेकेदारों को प्रतियोगिता से बाहर करने की बात भी करता सुनाई दे रहा है।
अधिकारी–पार्षद की जुगलबंदी उजागर
एक बात तो साफ हैनगर पंचायत में अधिकारी और पार्षद की जुगलबंदी इतनी मजबूत हो चुकी है कि हर निर्माण कार्य में दोनों मिलकर “बंदरबांट” कर रहे हैं। शासन के नियम, पारदर्शिता और जवाबदेही सब ताक पर रख दिए गए हैं।
उच्च स्तरीय शिकायत की तैयारी
मिली जानकारी के अनुसार अब इस मामले में पीड़ित ठेकदार उच्च स्तरीय शिकायत करने की तैयारी कर रहे, उनका कहना है कि अब इस तरह की मनमानी के खिलाफ राजधानियों रायपुर तक शिकायत दर्ज कर अधिकारियों की भी शिकायत की जाएगी। जो जुगल बंदी कर इस पूरे खेल को खेलते आ रहे ।

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