पार्ट _02_ बॉर्डर में दिन रात घूमती दो परछाइयां, अवैध उगाही के साथ अवैधानिक कार्यों को संरक्षण

 धमतरी ज़िले के के बॉर्डर में घूमती दो परछाईं – पार्ट 2

प्रतीकात्मक फोटो 

धमतरी _ टीम आइस ऑफ छत्तीसगढ़ _रात की स्याही जितनी गहरी होती जा रही थी, बॉर्डर की सड़कें उतनी ही रहस्यमयी लगने लगती है  हवा में कुछ ऐसा था, जिसे महसूस तो किया जा सकता था, पर देखा नहीं जा सकता था ठीक वैसे ही जैसे उन दो अदृश्य परछाइयों की मौजूदगी, जिनका नाम लेते ही व्यापारी और ट्रांसपोर्टरों की सांसें थमी-थमी रहने लगती थीं। जी हां धमतरी जिले के रहने वाले दो परछाइयां धान खरीदी शुरू होते ही बॉर्डर पर ऐसे सक्रिय हो जाते है मानो किसानों के लिए धान बेचने का टोकन कटने का मामला इन पर भी फिट बैठता हो , दोनों अदृश्य परछाइयां इस इलाके के दोनों राज्य की सीमाओं पर कार में फर्राटे मारते कई बार कैमरे में कैद हुवे है , सिर्फ इस वर्ष नहीं कई वर्षों से इन दोनों परछाइयों का उगाही वसूली का खेल बदस्तूर जारी है, खुद को इंसाफ का नुमांइदा बता कर दोनों राज्य के व्यवसायियों से भारी भरकम लेवी लेकर दोनों वसूलीबाज खूब धन कमाते है , सूत्र बताते है कि इस धान खरीदी के पूरे सीजन की वसूली से ही इनका पूरे वर्ष का घर का घरवालो का खुद का  खर्चे चलता है अगर भूले भटके यह कमाई इनके हाथों से खिसक जाए तो दोनों अदृश्य परछाइयां की माली स्थिति भारी खराब हो जाएगी ,जिससे फाइनेंस् की गई वाहन भी कंपनी द्वारा खींच  लेने की नौबत से इंकार नहीं किया जा सकता की ।

पार्ट _01_ में हमने इनके कार्यों की जानकारी अपने पाठकों को दी पार्ट _02_ में मिली जानकारी के अनुसार दोनों परछाइयां लगातार सीमाओं में फेरे लगाते देखे गए है , प्रमाणित फुटेज के लिए कुछ व्यापारियों ने दोनों राज्य की सीमाओं में लगे कैमरे की फुटेज आर टी आई के माध्यम से मांगी है , जिससे दोनों के रोजाना दिन रात सीमाओं में घूमने का प्रमाणित वीडियो उपलब्ध हों पर उनके "पावर जोन" में उनकी हकीकत को पहुंचाया जा सके , ताकि पवार जोन को भी  पता लग सके ...... कि उनके अधीनस्थ  परछाई किसी मिशन पर सीमाओं  में घूम रहे  या  यह  मिशन कई वर्षों की भांति इस वर्ष भी  उनकी वसूली का  ही रहा ......।

दो परछाइयां का एक अदना "लोकेशन मैन" भी था पिछले साल सक्रिय 

सालों से विशेष समय को पर्व के रूप में इस्तमाल करने वाले दो परछाइयां के समय समय पर कई सहयोगी बने , जानकारी के अनुसार इन दोनों ने कभी किसी को नहीं बक्शा ,एक कहावत इन पर चरितार्थ होती है ,की ऐसा कोई सगा नहीं जिसे इन्होंने ठगा नहीं , पिछले वर्ष सर्द रातों में दोनों अदृश्य परछाइयां के नकाब को बेनकाब करने इस छेत्र में जिले के दबंग शख्स ने कमर कसी , लोकल इनपुट के तौर पर वनांचल के एक शख्स ने भी इन दोनों के राज को खोलने का भरोसा दिखाते हुवे जिले के दबंग को भरोसा दिलाया,जो इस बॉर्डर पर पहुंचे , लेकिन कहते है न कि चोर चोरी से जाए पर सीनाजोरी से नहीं....... ठीक वैसे ही रंग बदलने वाले दोनों परछाइयों ने वनांचल के शख्स को मीठा मीठा लुभावना पेशकश कर ,जिले के दबंग के लोकेशन् को लेना शुरू कर दिया..... बाकायदा  रात 2 बजे 3 बजे दोनों परछाइयां लोकेशन मैन से लोकेशन लेकर खुद के मूमेंट को बदलते रहते 

 आपदा मे अवसर 

 दोनों परछाइयों ने  दोनों राज्य के व्यापारियों को जिले दबंग के खुलासे से बचाने प्रति अवैध धान वाहन के 10 हजार रुपए चार्ज कर बॉर्डर पार करवाते रहे ....इसे कहते है आपदा में अवसर  बनाना ,सिर्फ चंद फेके हुवे टुकड़े को खाने के लिए वन्नाचल के चिरकुट ने जो खुद को जमीदार  कई एकड़ खेत का मालिक बताता फिरता, ने  इमान को बेच, दो परछाइयां का भरपूर साथ दिया,पर वक्त के साथ दोनों ने उक्त चिरकुट को भी ठगने से बाज नहीं आए.....इसे कहते है ....बुरे काम का बुरा नतीजा 

.....लाल हुआ गाल और शांत हुआ था इलाका.....

आइस ऑफ छत्तीसगढ़ की टीम जैसे जैसे इनके बारे में तहकीकात कर रही वैसे वैसे दो परछाइयों के कई कारनामे सामने आ रहे ......दोनों परछाइयों ने  बॉर्डर के इलाकों में ऐसा उत्पात मचा रखा अवैध वसूली का की .... कुछ दिनों पहले, एक व्यापारी ने एक परछाई का गाल लाल तक कर दिया था—कहते हैं, थप्पड़ इतना जोरदार था कि बॉर्डर की हवा कुछ दिन तक शांत रही। लोगों ने सोचा, शायद अब परछाइयों की दादागिरी कम होगी। पर वे दोनों काली  रात की तरह थे—थोड़े समय के लिए गायब, पर कभी पूरी तरह खत्म नहीं।

अब होगा इनका सफाया ,होगा इंसाफ

स्थानीय  पीड़ित ग्रामीणों ने आरटीआई कार्यकर्ता के साथ मिलकर दोनों परछाइयों का फुटेज निकालने की तैयारी शुरू कर दी थी। वजनी परछाई का ‘पावर ज़ोन’ ......जहां उसका असली रसूख छिपा है ......वहीं तक यह वीडियो भेजने की योजना बना ली  गई है । अब देखना ही की पिछली बार की शिकायत में बाल बल बचे वजनदार परछाई अब कब तक खैर मना पाती है 



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