वसूली का जाल : सत्ता की छाया में जन्म लेता एक काला खेल

वसूली का जाल : सत्ता की छाया में जन्म लेता एक काला खेल


धमतरी _ टीम आइस ऑफ छत्तीसगढ़
_जनता की सेवा का वचन लेकर पद की चौखट पर चढ़ने वाले कुछ चेहरे, समय बीतते ही जैसे किसी और ही दुनिया के किरदार बन जाते हैं। सत्ता का स्पर्श मिलते ही कुछ हाथ सहायता नहीं, बल्कि वसूली के लिए ही आगे बढ़ते दिखाई देते हैं। कहीं कोई जनहितैषी बनकर, तो कहीं किसी दल का नाम उछालकर—यह काला खेल चुपचाप चलता रहता है।

धमतरी में ‘फर्जी छापे’ का खेल

पिछले दिनों धमतरी के एक शांत गांव में ऐसा ही एक रोमांचक किस्सा सामने आया। गांव के एक घर में दिन के उजाले  पहुंचे कुछ अनजान लोग—अपने को विशेष एजेंसी के अधिकारी बताते हुए भीतर दाखिल हो गए। कागज़, फाइलें, मोबाइल, लैपटॉप… जो हाथ लगा, उठा ले गए। लेकिन कहानी उलझी तब, जब ग्रामीण ने मामले की शिकायत थाने में की। जो ‘अधिकारी’ बनकर आए थे—उनका ताल्लुक किसी सरकारी विभाग से नहीं, बल्कि एक खास दलों से बताया गया। वायरल हुए एक ऑडियो में तो कथित तौर पर पाँच लाख की डील की चर्चा ने पूरे इलाके में भूचाल ला दिया। शिकायत हुई, जांच आगे बढ़ी, दो चेहरे हिरासत में आए—और एक अब भी परछाइयों में गुम है।

एक और ‘प्रभावशाली’ शख्स… और धौंस का सिलसिला

इधर जिले का ही एक शख्स......जो अपनी ग्रामीण जनप्रतिनिधि  के पद का रुआब लेकर चलता है......जो लगातार सुर्खियों में है। जहां जाता है, वहां उसकी वही पुरानी आदत......धौंस, दबाव, और लेन-देन का खेल।

कभी विभागीय अधिकारी परेशान, कभी ठेकेदार हलकान।

जिस काम पर इसकी नजर पड़ जाए, वहां या तो रुकावट, या फिर ‘समझौते’ की फुसफुसाहट सुनाई देने लगती है। कहते हैं कि बीते समय में यह नाम कई चर्चित घटनाओं की वजह से भी चर्चा में रहा,  अब  वर्तमान में यही चेहरा फिर सुर्खियाँ बटोर रहा है। इस बार विभागीय अधिकारियों को धमकाने, मनमानी मांगें रखने और ठेकेदारों पर दबाव बनाने की खबरें चर्चाओं में हैं। जिसके कुछ ऑडियो भी जमकर वायरल हो रहे 

कई प्रभावित लोग शिकायत के दस्तावेज तैयार कर चुके हैं—और जल्द ही बड़ा कदम संभव है।

 जब जनता विश्वास के साथ किसी को आगे बढ़ाती है, तो उम्मीद होती है........विकास के रास्ते खुलेंगे, न कि वसूली के दरवाजे। लेकिन कुछ लोग जनता के भरोसे को अपनी निजी कमाई का औजार बना लेते हैं। यह कहानी सिर्फ एक जिले की नहीं—यह उस प्रवृत्ति की है, जो लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करती है। अब देखना यह है कि कार्रवाई की अगली कड़ी कहाँ तक जाती हैर क्या इस बार जनता का विश्वास लौट पाएगा, या काला खेल फिर किसी नए चेहरे के साथ लौट आएगा…


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