धमतरी में रेत का काला खेल_जिम्मेदार ही बने विभीषण, निकलने से पहले ही देते है खबर, तन्खा के साथ मुखबिरी के लिए भी हर महीने मोटी रकम
आइस ऑफ छत्तीसगढ़ _ महानदी के उद्गम स्थल के रूप में पहचान रखने वाला धमतरी जिला इन दिनों अवैध रेत खनन को लेकर फिर सुर्खियों में है। हर वर्ष 15 जून से वर्षा ऋतु को देखते हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों के तहत रेत खदानों में खनन और परिवहन पर प्रतिबंध लागू हो जाता है। इसके बावजूद जिले में कई स्थानों पर अवैध उत्खनन और परिवहन जारी होने के आरोप लग रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, सूचना लीक करने के एवज में कर्मचारियों को हर महीने मोटी रकम मिलने की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज और कथित साक्ष्य एक स्थानीय पत्रकार के पास मौजूद हैं, जिनका जल्द खुलासा होने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इन दावों की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
यह भी कहा जा रहा है कि जिले में अवैध रेत खनन का यह खेल नया नहीं है, बल्कि वर्षों से चलता आ रहा है। समय-समय पर कार्रवाई के दावे जरूर किए जाते हैं, लेकिन प्रतिबंध के दौरान भी रेत का अवैध कारोबार जारी रहने से विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। साथ ही फील्ड सहित दफ्तर में रहने वाले कर्मचारी महिले की पेशकश लेकर यह सब कार्य लंबे समय से कर रहे
यदि आरोपों में सच्चाई पाई जाती है, तो यह केवल राजस्व की हानि का मामला नहीं होगा, बल्कि महानदी के पर्यावरण, नदी तंत्र और सरकारी व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करेगा। साथ ही सरकार से मिलने वाली तनखा के साथ पूरे विभाग के आँखों में धुल जोख कर मोटी कमाई करने वाले कर्मचारी की नौकरी के साथ उन पर प्रशाशनिक कार्यवाही होनी भी जरूरी है

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