महानदी का सीना चीरता रेत माफिया, प्रतिबंध के बावजूद भर्रारी ( लीलर )घाट में धड़ल्ले से जारी अवैध खनन

राजेश चावला 

धमतरी_ आइस  ऑफ छत्तीसगढ़ _शासन द्वारा 15 जून 2026 से वर्षाकालीन अवधि में रेत खनन एवं परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद ग्राम भर्रारी ( लीलर )की रेत खदान में नियमों को खुलेआम चुनौती दी जा रही थी। आखिरकार लगातार शिकायतों और स्थानीय जागरूक नागरिकों के दबाव के बाद खनिज विभाग ने कार्रवाई करते हुए दो चैन माउंटेन मशीनों सहित सात हाईवा वाहनों को जब्त किया है।

जानकारी के अनुसार, महानदी के ( लीलर )घाट में प्रतिबंध के बावजूद भारी मशीनों की मदद से नदी का सीना चीरकर रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा था। खनिज माफिया दिन-रात रेत निकालकर परिवहन में जुटे थे, जबकि प्रशासनिक आदेश स्पष्ट रूप से इस गतिविधि पर रोक लगाते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से यह खेल चल रहा था, लेकिन जिम्मेदार विभाग की नजरें इस ओर नहीं गईं। शिकायतों के बाद ही विभाग हरकत में आया और कार्रवाई करनी पड़ी। 


यह पहला मौका नहीं है जब यह घाट सुर्खियों में आया हो। लगभग एक वर्ष पूर्व भी प्रतिबंधित अवधि में इसी घाट से अवैध खनन और परिवहन का मामला सामने आया था। रेत निकासी को लेकर हुई  कार्यवाही के बाद एक विवाद ने हिंसक रूप ले लिया था, जिसमें चाकूबाजी की घटना में ज्वरगांव का  युवक  गभीर रूप से घायल हो गया था।  इस हाई-प्रोफाइल मामले में अर्जुनी थाना में शिकायत दर्ज होने के बाद कई लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और जिले के कुछ चर्चित नाम भी चर्चा में आए थे। वही इस मामले  में प्रदेश की सियासत भी खूब गर्म हुई थी
 अब एक बार फिर उसी घाट में प्रतिबंध के दौरान रेत चोरी का मामला सामने आने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सूत्रों  से मिली जानकारी के अनुसार फिर से माफिया सक्रिय हो गए है जो घाट में अवैध खनन परिवहन को अंजाम दे रहे चर्चा यह भी है कि पूर्व  के कुछ प्रभावशाली नाम फिर से सुर्खियों में हैं। ऐसे में यह कार्रवाई केवल वाहनों और मशीनों की जब्ती तक सीमित रहेगी या पूरे नेटवर्क तक पहुंचेगी, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।

गौरतलब है कि वर्षा ऋतु में पर्यावरण संरक्षण और नदी तंत्र को सुरक्षित रखने के लिए शासन अवैध खनन पर सख्ती बरतता है। लेकिन इसी अवधि में रेत की कीमतें बढ़ जाने से माफिया सक्रिय हो जाते हैं और बिना अधिक निवेश के करोड़ों रुपये के अवैध कारोबार को अंजाम देते हैं। भर्रारी ( लीलर ) घाट का ताजा मामला भी इसी कड़वी सच्चाई को उजागर करता है कि प्रतिबंध के बावजूद महानदी का सीना चीरने वाले तत्व अवसर मिलते ही कानून को ठेंगा दिखाने से नहीं चूकते।अब सवाल यह है कि क्या यह कार्रवाई अवैध खनन पर स्थायी लगाम लगा पाएगी, या फिर कुछ दिनों की खामोशी के बाद महानदी के किनारे वही पुराना खेल दोबारा शुरू हो जाएगा।