साइबर थाना बनाम ऑनलाइन सट्टा — धमतरी की असहज सच्चाई

 साइबर थाना बनाम ऑनलाइन सट्टा — धमतरी की असहज सच्चाई


( राजेश चावला

आईज ऑफ छत्तीसगढ़ _धमतरी जिले को साइबर थाना मिलने को बड़ी उपलब्धि बताया गया। भवन बना, अधिकारी नियुक्त हुए, संसाधन दिए गए। उद्देश्य साफ था—ऑनलाइन अपराध पर लगाम। लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है.......आज जिले में ऑनलाइन क्रिकेट सट्टा खुलेआम फल-फूल रहा है। हर मैच, हर गेंद पर लाखों रुपये का दांव लगया जा रहा है...... हालात यह हैं कि......बच्चे, युवा और बुजुर्ग तक मोबाइल पर सट्टा आईडी लिए नजर आते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो जिले में क्रिकेट सट्टा अघोषित रूप से वैध कर दिया गया हो.......सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सट्टे के संचालक किसी से छिपे नहीं हैं। मास्टर आईडी बांटने वाले, हवाला के जरिए रकम इधर-उधर करने वाले युवक, महंगे मोबाइल, बाइक और कार में खुलेआम घूमते देखे जा सकते हैं....... शहर जानता है, मोहल्ला जानता है, फिर भी कार्रवाई न होना कई सवाल खड़े करता है।


यह वही जिला है जिसने कई घटनाओं  में अंतरराज्यीय गिरोहों पर सफल कार्रवाई कर यह साबित किया है कि पुलिस में क्षमता की कमी नहीं है। फिर सवाल यह है कि रोज़-रोज़ चल रहे इस सट्टा सिंडिकेट पर हाथ क्यों नहीं डाला जा रहा? क्या छोटे स्तर पर फैल रहे इस अपराध को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?

सबसे बड़ा खतरा युवा पीढ़ी के भविष्य पर मंडरा रहा है। सट्टा केवल जुआ नहीं, बल्कि अपराध की पहली सीढ़ी है। यही रास्ता कर्ज, तनाव, चोरी और आगे चलकर संगठित अपराध तक ले जाता है।........अगर साइबर थाना होने के बाजूद जिले में ऑनलाइन सट्टा बेरोकटोक चलता रहे, तो सवाल केवल व्यवस्था पर नहीं, नीयत पर भी उठता है..... जब  भी तब जब अपराध सबकी नजर में हो और कानून मौन रहे.......जिले की जनता अब कहने लगी है कि धमतरी में सट्टा बढ़ नहीं रहा,उसे बढ़ने दिया जा रहा है। 

अब देखना होगा कि कई टूर्नामेंट जो निर्वघन बिना किस कार्यवाही के चली गई ......तो क्या वर्ल्ड कप 20,20 भी  खाईवालों के पाले में ही जाता  है .....या कोई कार्यवाही हो भी पाती है ।

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