आचार्य जी ने स्वयं तो प्रमाद एवं आलस्य का त्याग कर कर्मशीलता को अपनाया_ संत लोकेश साईं

 आचार्य जी ने स्वयं तो प्रमाद एवं आलस्य का त्याग कर कर्मशीलता को अपनाया_ संत लोकेश साईं 



धमतरी _इन सात की सेवा से महान पुण्य एवं अपार आनन्द मिलता है *गंगा गीता गायत्री ज्ञानी गुरु गोबिंद  टेऊॅं सप्तम गाय को सेवे पा आनन्द* आचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज के द्वारा दी गई इस अनुपम शिक्षा को धारण कर गाय माता की हृदय से सेवा करने वाले *प्रतिदिन धमतरी की सड़कों पर घूम रही गायों को ढूंढ ढूंढ कर रोटी एवं अन्य खाद्य पदार्थ खिलाने वाले गुरु भक्त श्री अशोक कुमार वाधवानी* जी एवं उसके पुत्रों रोहन एवं पंकज के पुत्रों के द्वारा श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में जारी स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज के चालीहा महोत्सव के 18 वें दिन के सत्संग का आयोजन किया गया जिसमें आश्रम के सन्त श्री लोकेश कुमार जी ने महान कवि भगत परमानंद, अजमेर वालों के  द्वारा रचित भजन का सुमधुर गायन कर  कहा कि भगत एवं महान कवि ने पूज्यपाद स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज के स्वयं देखे करामातों, चमत्कारो को लिखा है *प्रेम रखी जे अचनि प्रेमी मतिलब तिनिजा पूरा थियनि निपुटा बणिजनि पुटड़नि वारा, निर्धन खे धन दौलत दि॒यनि, परमानंद मूं दि॒ठी करामत स्वामी टेऊॅंराम जी* परमानंदजी स्वयं भगत थे स्थान स्थान पर  भगत किया करते थे प्रतिदिन  कई प्रेमियों  के लिए पल्लव पाकर ईश्वर से प्रार्थना करके लोगों को मन वांछित फल प्रदान कराते थे लेकिन उन्हें खुद को औलाद नहीं हुई थी जब उनकी पत्नी पत्नी ने कहा आप प्रेमियों की मनोकामनाएं ईश्वर से प्रार्थना कर पूर्ण कराते है लेकिन अपनी गोद सूनी है उसको कैसे भरेंगे, यह संकट उन्होंने पत्नी से  कहा कि ईश्वर ने हमें जो ये अनुपम कला दी है इसका उपयोग परोपकार में तो किया जा सकता है लेकिन स्वयं के लाभ के लिए नहीं, ऐसा करो जयपुर में स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज की अमरापुर दरबार हैं जहां इनकी गद्दी पर विराजमान महान सन्त सद्गुरु स्वामी सर्वानंद जी महाराज बिराजमान हैं,  वे ही हम पर भी दया करेंगे एवं इसका उपाय बताएंगे तब वे जयपुर पहुंच कर पूज्य स्वामी सर्वानंद जी महाराज से इस हेतु प्रार्थना की, तो पूज्य स्वामी जी ने उनसे कहा कि *स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज की समाधी पर जाकर दर्शन करो एवं उन्हीं से प्रार्थना करो आपकी इच्छा बिल्कुल वे पूरी करेंगे उनकी आज्ञा के अनुसार समाधी स्थल पर जाकर उन्होंने आचार्य श्री  जी से करुण  स्वर में प्रार्थना की, जो पूरी हुई अगले ही वर्ष वे अपनी संतान के साथ अमरापुर दरबार में आकर दर्शन किया उन्होंने कृतज्ञता प्रकट करते  हुए निम्न भजन की रचना कर गाया*  कि मैने स्वयं स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज के उपकारों को महसूस किया है कि वे कैसे सरलता से लोगों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं जो उनकी समाधी पर श्रद्धा रखकर अपनी समस्या रखते हैं तो *वे तुरन्त उनकी पुकार सुन लेते है निर्धन को दौलत निःसंतान को संतान प्रदान कर उनका कल्याण कर देते हैं इसलिए आज घर घर में स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज की आराधना पूजा की जा रही है*  श्री प्रेम प्रकाश मण्डल के वर्तमान अध्यक्ष पूज्य गुरुदेव स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने 18 वें दिन सद्गुरु महाराज की कर्मशीलता का गुणगान कर बताया कि *आचार्य जी ने स्वयं तो प्रमाद एवं आलस्य का त्याग कर कर्मशीलता को अपनाया* एवं इसी *कर्मशीलता के लिए गीता में श्री कृष्ण भगवान ने जो उपदेश दिया है उसे पूरे विश्व में सभी जीवों तक पहुंचाने का कार्य जीवन पर्यन्त किया जिससे लोगों का कल्याण हो*

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