प्रतिदिन अपने माता पिता गुरु एवम् भगवान का दर्शन एवम् चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने से जीवन सुखमय हो जाता है _ संत लोकेश जी

प्रतिदिन अपने माता पिता गुरु एवम् भगवान का दर्शन एवम् चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने से जीवन सुखमय हो जाता है _ संत लोकेश जी

रज्जब तुम गज्जब किया,बान्धा सिर पर मोर । आए थे हरि मिलन को,जात नरक की ठौर , 

धमतरी  06 जुलाई _ श्री प्रेम प्रकाश मंडलाचार्य सद्गुरु स्वामी टेऊॅंराम जी महाराज के चालीहा महोत्सव के 35 वें दिन के चालीसा पाठ एवम् सत्संग का आयोजन श्री दादा फूलचंद वाधवानी, महेशकुमार एवम् लक्की वाधवानी के परिवार द्वारा श्री प्रेम प्रकाश आश्रम में किया गया जिसमें उपस्थित सभी भक्तों ने सत्संग रूपी गंगा में आनन्द भरी डुबकी लगाकर समय को सफल किया आज सत्संग के दौरान सन्त लोकेश जी ने बताया कि प्रतिदिन अपने माता पिता गुरु एवम् भगवान का दर्शन एवम् चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लेने से जीवन सुखमय हो जाता है जीव को संसार मे जीवन यापन करने के लिए नाना प्रकार के कार्य करने पड़ते हैं जीवन में नाना प्रकार के रिश्ते नाते बनते जाते हैं जिसमें उलझ कर जीव अपने आप को भूल जाता है ईश्वर को जिसका वह अंश है उसी को भूल जाता है

इस बात को महान सन्त रज्जब जी ने अपने इस दोहे में बड़े अच्छे ढंग से कहा है *"रज्जब तुम गज्जब किया,बान्धा सिर पर मोर । आए थे हरि मिलन को,जात नरक की ठौर ।।"* मनुष्य अपने परिवार के लिए सब प्रकार के सुख सुविधाओं को इकट्ठा करता है लेकिन खुद के लिए कुछ भी नहीं कर पाता है इसका एक दृष्टांत देकर बताया कि एक इमारत बनाने वाला कलाकार था जिसने अपने राजा के लिए अनेक इमारतें बनाई राजा उसकी कला एवम् ईमानदारी से बहुत प्रभावित था राजा ने उससे कहा अब एक और इमारत बना दो उसका मन अब काम करने का नहीं था लेकिन राजा के डर से उसने उस इमारत को तो बनाया पर उतनी चेष्टा से एवम् उतने अच्छे से नहीं बनाया जैसा तैसा काम किया न तो सुन्दर बनाया न तो मजबूत बनाया जब इमारत बनी तो राजा ने कहा मैंने यह इमारत आपको भेंट देने के लिए बनवाई है तब वह बहुत पछताने लगा मैंने सारी जिन्दगी ईमानदारी से काम कर अच्छी अच्छी इमारतें बनाकर खड़ी की लेकिन अपने लिए ही मैंने न तो कला का उपयोग किया न ईमानदारी से अच्छा मटेरियल उपयोग किया न मजबूती का काम किया काम चलाऊ बना बैठा यही काम हमारा है दनिया के लिए काम करते करते हमारी जिन्दगी बीत जाती है अपने लिए कुछ नहीं कर पाते हैं इसलिए अभी भी समय है अपने लिए अच्छा कर लें पुण्य के काम कर लें ईश्वर से नाता जोड़ लें ईश्वर से यही प्रार्थना करें कि हम तुम्हारे थे प्रभु जी हम तुम्हारे हैं और तुम्हारे ही रहेंगे तुम हमारे थे प्रभु जी तुम हमारे हो और हमारे ही रहोगे ईश्वर से जो नाता है वही सच्चा है एवम् बाकी सारे नाते मतलब के हैं अतः सभी नातों को निभाते हुए ईश्वर के सच्चे नाते से गुरु के सच्चे नाते से हमेशा जुड़े रहें एवम् अपने लिए भजन भक्ती सेवा सिमरन रूपी धन इकट्ठा करें

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