अनवरत बह रही है धर्म की धारा, टेऊॅं राम मन्दिर में चालीसा महोत्सव की धूम, श्रद्धालु बड़ी संख्या में कर रहे प्रवचन का श्रवण
धमतरी 03 जुलाई _प्रार्थना एवम् पुरुषार्थ ये दो बड़े सरल साधन हैं जिनसे जीवन बड़े से बड़े संकट में भी संवर जाता है इस बात को आचार्य जी ने अपनी दोहावली के इस दोहे में स्पष्ट कहा है *प्रार्थना कर प्रेम से,पुन पुरुषार्थ तात, कह टेऊॅं इनके किए होवे तव कुशलात* आज सद्गुरु महाराज के चालीहा महोत्सव के 32 वें दिन के स्वामी टेऊॅंराम चालीसा पाठ एवम् सत्संग का आयोजन श्री प्रेम प्रकाश आश्रम पर श्री अनिल हिरानी एवम् दिलीप हिरानी के परिवार द्वारा किया गया
जिसमें चलीसा पाठ के पश्चात् आश्रम के सन्त जी के द्वारा प्रार्थना एवम् पुरुषार्थ की महिमा बताते हुए श्री प्रेम प्रकाश मण्डल के वर्तमान अध्यक्ष गुरुवर सद्गुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज के द्वारा रचित प्रार्थना से परिपूर्ण भजन *"मुझको अपनी शरण में ले लो स्वामी टेऊॅंराम बाबा तुझ बिन जग में मेरा कोई और नहीं आधार है"* को बड़े ही विनम्रता पूर्ण भाव से मधुर स्वर में गाकर बताया कि जेसे कोई भी बालक खेलते खेलते किसी के साथ लड़के या मार पीट करके कोई अपराध कर बैठता है तो अपने बचाव के लिए आपनी माता की शरण में आकर उसकी गोद में बैठ कर अपने को सुरक्षित महसूस करता है माता की शरण उसे भय मुक्त कर देती है माता उसके अपराध क्षमा कर देती है
उसी प्रकार गुरु की शरण भी हमें भय मुक्त कर देती है जीवन में कोई भी संकट आ जाए विपत्ति आ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है *अपने गुरु की शरण में जाकर प्रार्थना करनी चाहिए,प्रार्थना में नम्रता,समर्पण का भाव,श्रध्दा एवम् विश्वास के साथ साथ निर्मानता का भाव भी होना चाहिए* जैसे इस भजन में इन भावों के साथ प्रार्थना की गई है तभी हम गुरुबाबा की दया दृष्टि के पात्र बनेंगे प्रार्थना के साथ पुरुषार्थ भी करना बहुत जरूरी है बरसात हो रही हो उसमें जितना बड़ा बर्तन रखा जाएगा पानी उतना उसमें भर जाएगा लेकिन यदि बर्तन उल्टा रखा होगा तो कैसे भरेगा या बर्तन यदि साफ होगा तो उसमें भरा पानी भी स्वच्छ होगा बर्तन यदि मैला है एवम् उसमें गन्दगी भरी है तो वह इक्ट्ठा हुआ जल भी मैला होकर किसी काम का नहीं रहेगा वैसे ही जब भी कभी किसी भी सत्संग में जाएं तो अपने मन में भरे दुनिया के नाना प्रकार के कचरे को फेंक कर मन को स्वच्छ करके आयेंगे एवम् बर्तन को सीधा रखकर माने मन को पूर्ण एकाग्रता से सत्संग का श्रवण करने में लगाएंगे तो जो सत्संग में अमृत वचनों की बरसात होती है उससे हृदय उन सद्गुणों से उपदेशों से भरेगा भी एवम् वे उपदेश स्मरण में माने याद भी रहेंगे एवम् समय पर काम भी आयेंगे अब हृदय में बसे उन शिक्षाओं को उपदेशों को जीवन में अमल में लाने का पुरूषार्थ करना होगा *गुरु के बताए मार्ग पर चलने का पुरुषार्थ करना होगा उनके द्वारा प्रदत्त नाम को नित्य प्रति जाप करने का सुमिरन करने का पुरुषार्थ करना होगा सभी जीवों की भलाई वाले कार्य करने एवम् परोपकार के कार्य करने का पुरुषार्थ करना होगा तभी कल्याण होगा*



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