प्रेम प्रकाश आश्रम में चालीसा महोत्सव का 33 वा दिन,पाठ सत्संग संग भजन कीर्तन

 प्रेम प्रकाश आश्रम में चालीसा महोत्सव का 33 वा दिन,पाठ सत्संग संग भजन कीर्तन 


धमतरी 04 जुलाई _ आज स्वामी टेऊॅंराम चालीहा महोत्सव के खुशियों भरे 33 वें दिन का चालीसा पाठ एवम् सत्संग का आयोजन पूज्य भाईसाहब अशोक कुमार जी वाधवानी एवम् सोनू वाधवानी के परिवार द्वारा आयोजित हुआ जिसमें उपस्थित सभी भक्तों ने भजन कीर्तन का भरपूर आनन्द लिया


गौर तलब है कि धमतरी में श्री प्रेम प्रकाश आश्रम के निर्माण के पूर्व भाईसाहब अशोककुमार जी के पिताश्री भाई साहब जागणमल जी एवम् उनकी माता जी के सानिध्य में उनकी ही दरबार में श्री प्रेम प्रकाश मण्डल के सारे कार्यक्रम सत्संग जन्मोत्सव आदि सम्पन्न होते थे आज के सत्संग में सन्त लोकेश जी ने आचार्यश्री के द्वारा रचित अमरापुर वाणी के राग आसा भजन "मनड़ा मुंहिंजा ज्ञान जो दि॒यो बा॒रिजांइ,अविद्या जी ऊंदहि टारिजांइ" को गाकर सुनाया एवम् बताया कि इस भजन में गुरु महाराज अपने मन को उपदेश देते हुए समझा रहे हैं,शरीर की तंदुरुस्ती एवम् इलाज डाक्टर के द्वारा होता है


और मन को ठीक करने का कार्य गुरु के द्वारा ही संभव हो पाता है,मन में अविद्या रूपी अन्धकार भरा है इसके निवारण के लिए गुरु महाराज मन में ज्ञान का दीपक जलाने की शिक्षा देते हुए इस भजन में फरमा रहे हैं कि इस देह माने शरीर में अनेक दीपक ईश्वर ने प्रदान किए हैं जिनके द्वारा बाहर का अंधकार दूर होता है जैसे नेत्र दीपक के द्वारा संसार में बाह्य वस्तुओं दृश्यों को देखना सम्भव होता है सामने क्या है इसका ज्ञान होता है नाक रूपी दीपक के द्वारा खुशबू बदबू का ज्ञान होता है कान रूपी दीपक से स्वरों का आवाज का संगीत का ज्ञान होता है हाथ,पैर, त्वचा, स्पर्श आदि दीपकों से विभिन्न प्रकार का ज्ञान होता है लेकिन इस मन की अविद्या को दूर करने के लिए हृदय में बैठे परमात्मा का ज्ञान करने के लिए मन में हृदय में प्रकाश के लिए ज्ञान रूपी दीपक जलाने की आवश्यकता है, अज्ञान,अविद्या के कारण ही इस संसार में अनेक जीव दुःख को झेल रहे हैं वे खुशनसीब हैं जिन्हें गुरु के द्वारा ज्ञान प्राप्त होता है जिस ज्ञान से उनके सारे दुःख दर्द मिट जाते हैं उनका जीवन सुखमय हो जाता है गुरु के द्वारा विवेक मिलता है जिससे भलाई एवम् बुराई का ज्ञान होता है,यह ज्ञात हो जाता है बुराई से दुःख ही मिलता है और भलाई से सुख ही मिलता है तो मन को भलाई के अच्छे कार्यों को करने के मार्ग में लगाने की प्रेरणा मिलती है जिनको सत्गुरु से ज्ञान रूपी दीपक जलाने की कला मिलती है एवम् जो सत्गुरु के बताए मार्ग को अपनाते हैं उन लोगों का हीरे से भी अनमोल मनुष्य जन्म सफल हो जाता है गुरु के ज्ञान बिना जीवन बेकार एवम् निरर्थक है इसलिए जीवन को सांसारिक लोगों को खुश करने में नष्ट मत करो अपने गुरु को राजी करो जिनके राजी होने से सब राजी होंगे गुरु को प्रसन्न करके उनसे ज्ञान का मार्ग प्राप्त करो हृदय में ज्ञान का दीपक जगाकर हृदय को प्रकाशित कर आतम देव का साक्षत्कार करो

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