अजब गजब ,पहले हटाया, फीर एक को बुलाया, दैनिक कर्मचारी का बड़ा जैक, जुगत हुई सफल,पहले ही किया था दावा , सत्य साबित हुआ दावा
धमतरी 20 मार्च _ धमतरी जिला पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण यांत्रिकी विभाग ( आर ई एस) के परीसर के अंदर में पिछले दिनों देर शाम विभाग के डेली विजेस कर्मचारी और एक अन्य विभाग के कर्मचारियों द्वारा शराब खोरी की महफिल सजी हुई थी, मामले का वीडियो और फोटो एक कैमरे में कैद गया, मामला कैद होने के दौरान कर्मचारियों ने शराब की बोतल अपनी बाइक की डिक्की में डालकर नौ दो ग्यारह होकर भाग खड़े हुवे ,पूरा मामला केमरे में कैद हो गया , मामले की जानकारी विभाग की उच्च अधिकारी जिला पंचायत सीईओ विभाग तात्कालिक ई को भी दी गई, जिस पर एक सप्ताह बाद जिला पंचायत सीईओ ने कार्यवाही करते हुए विभाग के तीन दैनिक वेतन भोगियो को कार्य से पृथक कर दिया, एक सप्ताह घटना के बाद पृथक हुई कार्रवाई से पहले विभाग के यही डेली विजेस कर्मचारी शहर के कई चौक चौराहा पर यह मौखिक रूप से कहते भी पाए गए कि, *हमारी पहुंच बड़े-बड़े लोगो से है, जिनके बिना विभाग का पता भी नही सरकता,उन्होंने उन्हें आश्वस्त किया है कि, उन पर किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं होगी और अगर होती भी है तो कुछ दिन में उन्हे फिर से इस विभाग में अपने मूल कार्य पर लौट आएंगे* , हुआ भी यही जिला पंचायत सीईओ रोमा श्रीवास्तव द्वारा इन तीन कर्मचारियों को हटाया तो जरूर गया पर उसमें से महज *कुछ ही दिनों बाद एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारि को पुनः उसके मूल स्थान पर वापस ले आया गया है* जिससे चौक चौराहे में छाती ठोक कर अपना रौब दिखाने वाला कर्मचारी की बात सत्य होती दिखाई दे रही है साथ ही यह भी बात अब सही मानी जाने लगी है कि जिले के बड़े अधिकारी भी इन *रौब दार लोगो के समाने बोने साबित हो रहे*
टेंडर लगाने से लेकर आडिट तक का कार्य करता है दैनिक वेतन भोगी
*सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जिस दैनिक वेतन कर्मचारी को वापस विभाग में उसके मूल स्थान पर ला लिया गया है वह पिछले 15 सालों से विभाग में कार्य कर रहा है टेंडर लगाने से लेकर ऑडिट ( बड़े बाबू का कार्य) महत्वपूर्ण कार्य इस दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी द्वारा कराए जाते हैं लाजमी है इसकी पहचान बड़े-बड़े लोगों से होनी स्वाभाविक है*
ऊपरी आदेश पर रखा गया है एक दैनिक वेतन भोगी को _ नवनियुक्त प्रभारी अनिल मिश्रा
ग्रामीण यांत्रिकी विभाग के नयनियुक्त ई अनिल मिश्रा से जब एक कर्मचारी के वापस अपने मूल कार्य पर आने की जानकारी ली गई तो, उन्होंने बताया कि, उच्च अधिकारी के निर्देश पर पुनः दैनिक वेतन कर्मचारी को उसके मूल कार्य पर लगाया गया है, दैनिक वेतन कर्मचारी काफी पुराना है, जिसे काम का पूरी तरह से अनुभव है उसके कार्य पर नहीं होने से विभाग के कई कार्य सही तरह से संचालित नहीं हो पा रहे थे, वही दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों ने सीईओ जिला पंचायत से जाकर गुहार लगाई है जिस पर जिला पंचायत द्वारा उन्हें पुनः अपने मूल कार्य पर वापस भेजा गया है अब सवाल यह उठता है कि आखिर साफ साफ नियम कायदे का उलंघन करने वाले दैनिक वेतन कर्मचारी को अभय दान क्यों दिया जा रहा ,क्या वाकई एक बड़े विभाग के दर्जनों अधिकारी कर्मचारियो का कार्य इनके बगैर रुक सा गया या इतना बड़ा विभागीय कुनबा इन कर्मचारीयों के बगैर असहाय हो गया , *अगर अभय वरदान देना ही था तो तीनो को क्यों नही दीया गया या कार्यवाही करनी ही नही थी तो कार्यवाही का दिखावा आखिर किया ही क्यों गया* सिर्फ एक पर परोपकार कर आखिर क्या साबित करना चाहते है जिले के अधिकारी?
मामले का विडियो देने पर शो कास नोटिस की कही गई थी बात
इस गजब मामले का एक और पहलू गजब कर रहा है जिसमें विभाग के उच्च अधिकारी द्वारा दैनिक वेतन कर्मचारियों को परिसर के अंदर शराब की महफिल सजा जाने के मामले में शो कास नोटिस देने की बात दूरभाष पर दी जा रही थी, अब यह सवाल उठता है कि आखिर दैनिक वेतन कर्मचारियों को एक विभाग के बड़े अधिकारी द्वारा मामले में उनकी सफाई ( शो कास नोटिस) दी जा रही थी क्या यह वाकई उचित व्यवस्था है एडमिस्ट्री की ,दैनिक वेतन कर्मचारी वह होते हैं जिन्हें कलेक्टर दर पर विभाग के छुटपुट कार्यों के लिए अल्प समय के लिए रखा जाता है, पर ग्रामीण यांत्रिकी विभाग में कई सालों से दैनिक वेतन कर्मचारी डटे हुए ,आज वर्तमान में जिले सहित पूरे प्रदेश में बेरोजगारों की संख्या दिन में दिन बढ़ती जा रही है पर विभाग के अधिकारी नियम कायदों का उल्लंघन करने वालों को भी संरक्षण देकर उन्हें बचाने में लगे हुए हैं, ऐसे में स्वच्छ और साफ सरल छवि के बेरोजगारों को रोजगार के लाले पड़े हुए हैं
*नहीं पी रहा था शराब खड़ा था बाकियों ने छलकाया था जाम इसलिए दिया गया अभय वरदान*
एक कर्मचारी के वापस अपने मूल कार्य पर आने की जब जानकारी जुटाए जा रही थी, तो सूत्रों से पता चला कि नियम कायदों का मोखौल उड़ाने वाले कर्मचारि द्वारा बड़ी सफाई और चतुराई से उच्च अधिकारी के समक्ष आवेदन निवेदन माफी नामा किया गया, मामले में उच्च अधिकारी द्वारा किस-किस ने शराब खोरी की की बात पूछी गई, जिसमें दो लोगों ने शराब सेवन करने की बात स्वीकारी, तो एक कर्मचारी ने खुद के स्वास्थ्य संबंधी मामले को लेकर शराब नहीं सेवन करने की बात अधिकारी के समक्ष रखें, जिस पर अधिकारी द्वारा भी उसकी बात बड़ी आसानी से मान ली गई , और उसे अभय वरदान देकर उन्हें उसके मूल कार्य पर वापस लौटाया गया ,*अब इस पर भी सवाल उठता है कि कैमरे में जब कैद हुआ पूरा मामला स्पष्ट दिखाई दे रहा, अगर स्वास्थ्य संबंधी मामला बता कर शराब सेवन नहीं करने की बात एक कर्मचारी कह रहा है ,उस कर्मचारि द्वारा शराब की बोतल को अपनी मोटरसाइकिल में रखकर अपनी मोटरसाइकिल में रखते साफ-साफ दिखाई दे रहा, और जब कैमरा से रिकॉर्ड कर रहे हैं व्यक्ति ने बात करनी चाहि तो कर्मचारी बाइक लेकर वहां से नौ दो ग्यारह होता हुआ भी कमरे में कैद हो गया, अगर संबंधित कर्मचारियों ने शराब सेवन नहीं की थी तो वह आखिर भागा क्यों? अगर वह शराब खोरी नहीं कर रहा था तो शराब की बोतल उसकी बाइक में आई क्यों? जब वह मामले में इंवॉल्व ही नहीं था तो बाइक की डिक्की खोलने के दौरान वीडियो बनाने वाले को बार-बार बाइक की डिक्की नहीं खोलना और रहने देने की बात आखिर कह रहा था क्यों?*
बहरहाल अब इस मामले में मीडिया प्रतिनिधियों द्वारा अभियान निरंतर जारी रख सत्यता उजागर होने तक आभियान छेड़ा जाने वाला है, ताकि नियम कायदों को धता बताकर जुगत लाकर बच निकलने वाले लोगो पर लगाम लगाई जा सके, साथ ही जरूरत मंद बेरोजगारों को उनके हक का रोजगार मिल सके......।


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